तुम्हारी गाय अब केवल भोट देती है

प्रिय बापू,


आज पूरा देश तुम्हें श्रद्धांजलि दे रहा है क्या दक्षिणपंथी क्या वामपंथी क्या मध्यममार्गी तमाम धर्म, जाति, विचारधारा से परे होकर पूरा हिन्दुस्तान ज़ार ज़ार रो रहा है जिसे देखो वही आँखों में आंसुओं का सैलाब लिए मंडरा रहा है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उनको एक खत A letter to Mahatama gandhi (Father of our nation)
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A letter to mahatma gandhi in hindi : 30 january

इसका एक चौथाई रोकर ही सावित्री ने सत्यवान के प्राण वापस पा लिए थे.. यमराज भी डरा सहमा हुआ है कि कहीं हम जय श्री राम का उद्घोष करते हुए उससे तुम्हारे प्राण न छीन लाएं ये बात अलग है की तुम यदि आ गए तो पिछली बार हमने तुम्हारी हत्या की थी अबकी बार तुम आत्महत्या कर लोगे।

तो प्रिय बापू इन आसुंओं के सैलाब को देख कर हमारे झांसे में मत फंसना क्योंकि हम दोगले हैं और हमारे आंसू घड़ियाल को भी मात दे देने में सक्षम(वैसे पता नहीं घड़ियाल रोता भी है या हम मनुष्यों ने ही उसे बदनाम किया हुआ है)। यदि इन आंसुओं का एक कतरा भी सच्चा होता तो कम से कम तुम्हारी हत्या के बाद तुम्हारा हिन्दुस्तान तो हम जिन्दा रखते!

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जब हमने तुम्हारी हत्या की तो सारी दुनिया स्तब्ध रह गई हमारी इस अभूतपूर्व कृतघ्नता से, किन्तु हमारा मन अभी भी नहीं भरा था और हम तुम्हारा क्रिया कर्म निपटा कर तुम्हारे सपनों और तुम्हारे व्यक्तित्व की हत्या में लग गए। हमने तुम्हारे व्यक्तित्व की हत्या के इस राष्ट्रीय ठेके को दक्षिणपंथियों, वामपंथियों और तुम्हारे नाम पर मलाई काटने वालों में बराबर-बराबर बाँट लिया.. क्या करते मज़बूरी थी, तुम थे ही इतने विराट व्यक्तित्व के धनी की एक के बस की बात ही नहीं थी।

एक पक्ष ने तुम्हें हिन्दू विरोधी, देश के बंटवारे का जिम्मेदार, मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाला, हिन्दू राष्ट्र की राह में सबसे बड़ा रोड़ा आदि आदि साबित करने का राष्ट्रीय प्रोजेक्ट शुरू किया और अपने बच्चों के अवचेतन में ही तुम्हारे प्रति घृणा भर दी तुम्हारी अहिंसा उन्हें कायरता लगने लगी।

तो वहीं दूसरे ने तुम्हें पूंजीवाद का संरक्षक, वर्ण व्यवस्था का समर्थक, बनिया, बुर्जुवा वर्ग का प्रतिनिधि तथा क्रान्ति की राह का सबसे बड़ा रोड़ा साबित कर दिया और तमाम विश्विद्यालयों में कुकुरमुत्ते की तरह फैले ये बुद्धिजीवी तुम्हारी बची हुई धोती भी 70 सालों से फाड़ने में लगे रहे और एक ऐसे क्रांतिकारी युवा अधेड़ों की फ़ौज तैयार कर दी जिसका मुंह ही तब खुलता है जब उसे सिगरेट के धुंवे का छल्ला बनाना हो अथवा तुम्हारा मखौल उड़ाना हो।

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तुम्हारे नाम पर मलाई काटने वालों की तो बात ही निराली रही उन्होंने तुम्हारे नाम के अलावा तुम्हारा सब कुछ त्याग दिया। खैर, यह तो रही तुम्हारे व्यक्तित्व की हत्या की बात अब आते हैं तुम्हारे सपनो की हत्या पर-

तुम्हारी अहिंसा को हम तुम्हारे साथ ही गंगा में प्रवाहित कर आए..।
तुमने सहिष्णुता, प्यार, बंधुत्व, राम-रहीम के एका की बात कर हिन्दुस्तान के निर्माण की बात की थी हमने जाति, धर्म, भाषा के नाम पर अपनी अपनी अलग पहचान बना ली और गाय,गंगा,तिरंगा के नाम पर एक दूसरे का खून पीने लगे।

तुमने साधन के पवित्रता की बात की और समाजसेवा को साध्य बताया और सत्ता को उसका साधन हमने सत्ता को ही साध्य बना लिया और उसके लिए किसी भी साधन के प्रयोग से नहीं हिचकिचाते ।

जिस खादी के माध्यम से तुमने इस देश को स्वावलम्बी बनाया उस खादी में हम खटमल की तरह घुस कर देश को खोखला बनाने में लगातार पूरी शिद्दत से लगे हुए हैं।
तुम्हारे ग्राम स्वराज के सपने को हमने साकार किया है.. बस अंतर है की उस स्वराज का नेतृत्वकर्ता दारु बाँट बाँट परधानी जीतता है।

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तुम्हारे लघु एवं कुटीर उद्योग की बात को भी हमने मान लिया है.. एक मूल अंतर केवल यह है की तुम्हारी अवधारणा से गांव और कस्बों की जरूरतों के सामन बनने थे जिससे समृद्धि और खुशहाली आनी थी लेकिन हमारे वाले से हिंसा, घृणा, दंगा पैदा किया जाता है।

तुम्हारे राम राज्य की अवधारणा जिसमे कोई शोषक और कोई शोषित नहीं था और तुम्हारा राम जो औदात्य का गुण धारण करता था जिसके लिए सभी समान थे, उसके इस परम्परागत रूप को हमने अपने हिसाब से बदल कर कट्टर तथा साम्प्रदायिक बना दिया है।

तुम्हारी गाय जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी और अमृत देती थी अब वह केवल वोट देती है।

तुम्हारे सदा सत्य बोलो की जगह पर अब हम जुबां केसरी बोलते हैं। तुम्हारे नशा मुक्त हिंदुस्तान की हालात यह है की यहां चुनाव आयोग से ज्यादा चुनाव लड़ने वाले को दारू पर भरोसा होता है पूरा लोकतन्त्र ही नशे की बुनियाद पर खड़ा है।

जिस हिन्दू धर्म से तुम आते हो उसने तुम्हे हिन्दू विरोधी और जिस मुसलमान के कल्याण के लिए तुम परेशान रहते थे उसने तुम्हे हिन्दू नेता घोषित कर दिया है और साथ में जिस हिन्दुस्तान के लिए तुमने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया वह हिंदुस्तान तुम्हे भूलने का मौका तलाशता रहता है।

(आप पढ़ रहे हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उनको लिखा गया एक खत : letter to father of our nation mahatama gandhi on his death anniversary : 30 january)

लिखने को तो अभी और भी बहुत कुछ है बापू लेकिन अब अगली पुण्यतिथि के लिए छोड़ देता हूँ तब तक हम तुम्हारी आशाओं की हत्या की प्रक्रिया में कुछ और प्रगति कर चुके होंगे ।

अपने पसंदीदा उपन्यास की एक लाइन तुम्हारे लिए लिखता हूँ- "हिंदुस्तान ने ही तुम्हे सबसे कम पढ़ा और समझा" और शायद यही हमारे समय की सबसे बड़ी विसंगति रही। लेकिन जानते हो बापू जब जब तुम्हे किसी जाति, धर्म, विचारधारा में सीमित करने का प्रयास किया जाता है न तब तब तुम और ज्यादा विराट व्यक्तित्व के साथ अत्यधिक प्रासंगिक होकर हमारे सामने आता है। 

तुम्हारा
एकलव्य, राष्ट्र का एक कृतघ्न नागरिक।



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