कुछ स्त्रियां जब होती हैं प्रेम में...






Hindi love poem on women
कुछ स्त्रियां 
प्रेम में सिर्फ प्रेम चाहती थी 
मैंने उनसे कहा 
स्पर्श जरुरी है 
उन्होंने मेरी बात मान लिया 

सबसे पहले 
उन्होंने सूखी धरती को छुआ 
धरती हरी-भरी हो गई 

फिर आसमान को 
ऊंचा आसमान 
आकर बाहों में सिमट गया 

फिर समुन्द्र को 
वह खारा समुन्द्र 
मिश्री जितना मीठा हो देह में घुल गया 

अंत में उन्होंने 
ईश्वर को छुआ 
ईश्वर पत्थर का हो गया 

[ये जो ईश्वर है 
स्त्रियों के जन्म से पहले 
एक पुरुष था]

ये बात कभी किसी पुरुष ने 
कभी किसी स्त्री को नहीं बताई। 

- संजय शेफर्ड


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