फलाने के दुल्हिन

फलाने की दुल्हिन : हिंदी कविता


मशीन में चारा काटती है।
चारे के साथ काटती है दु:खों को
सानी के साथ गोत देती है गमों को
गोबर के साथ पाथ देती है उपले में
कभी न पूरा हो सकने वाले स्वप्न।poem on women empowerment in hindi poem on women in hindi poem on women empowerment 
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आँचल के खुट से गठिया के
रखती है आटा की पिसाई का दाम
ठीक समय पर गेहूँ में डाल देती है यूरिया,
और दुपहरिया में जा कर हांक आती है
अरहर  के खेत से बकरियाँ।
सुलगा देती है शाम होने से पहले धुंअरहा
ताकि धुएं के साथ उड़ जाए
उसके हृदय की अनकही पीर।poem on women empowerment in hindi poem on women in hindi poem on women empowerment 
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चेफुआ झोंक के बनाती है भात
सनई के रस्सी से बनाती है गाय का पगहा
और बरूआ से बीनती है
बेटियों के गौने के खातिर मोनिया।
माँ कहती है लछमिनिया है वो
जब से अाई उसका घर भर गया।
मैं कहता हूँ कितनी अभागन है
उसका बेटा छीन लिया उसकी सौत ने।poem on women empowerment in hinpoem on women in hindi poem on women empowerment 
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जब शहर से आता उसका मरद और उसकी सौत
तो सोती है खटिया बिछा के भूसऊला में।
बैठती है अकेले आग के पास,
जोड़ती है भूसी का दाम,
और पूरा करती है हिसाब।
बेटा जब कहता है मौसी
तो कलेजे में मचलता हुआ वात्सल्य,
आँख के कोर पर आकर सूख जाता है।poem on women empowerment in hindi poem on women in hindi poem on women empowerment 
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ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव की बात पर
जब हँसती है तो उसकी झूलनी शरमा जाती है।
उसकी झूलनी में झूलते है
उसके जीवन के न जाने कितने रंग।

वह मेरे  गाँव की इकलौती औरत है
जो झूलनी पहनती है।

-पंकज प्रखर मिश्र
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