गीत चतुर्वेदी कृत खुशियों के गुप्तचर : पुस्तक समीक्षा

खुशियों के गुप्तचर : गीत चतुर्वेदी (पुस्तक समीक्षा)


Khushiyon ke guptchar : Geet chaturvedi (Book Review)

गीत चतुर्वेदी आधुनिक-युग का एक ऐसा नाम है जिसका जिक्र सबसे ज्यादा उनकी कविताओं के लिए किया जायेगा। ये पत्रकार, लेखक, कवि होने के साथ-साथ बेहद संजीदा व्यक्तित्व के धनी भी हैं। "आलाप में विरह", "न्यूनतम मैं" और  " खुशियों के गुप्तचर" इनके काव्य-संग्रह हैं। "सावंत आंटी की लड़कियाँ" तथा "पिंक स्लिप डैडी" इनका गद्य-सृजन है। इनकी रचनाओं का विश्व की लगभग 17 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है, साथ ही हिंदी के कई पुरस्कार भी मिले हैं।

प्रस्तुत है समीक्षा गीत चतुर्वेदी कृत काव्य-संग्रह  "खुशियों के गुप्तचर" की। 

भाव :- 

गीत चतुर्वेदी का यह तीसरा काव्य-संग्रह है। इस संग्रह की कविताओं का भाव-पक्ष अत्यंत प्रबल है। कविताओं का पाठन नया भाव, नया आयाम देता है। जैसे - 

सुना है, 
मरकर पिता पेड़ बन जाते हैं, 
छाँव देते हैं 
मेरे पिता उँगली बन गए 
जो उठती रहेगी तुम्हारी ओर । 

विचार :- 

पद्य भाव-प्रधान होता है लेकिन यदि विचार का भी तालमेल अच्छा हो तो कविता की उम्र बढ़ जाती है। गीत चतुर्वेदी की कविताओं की कुछ पंक्तियाँ भी आपको किसी संजीदा, अलग, अनूठे विषय पर विचार हेतु बाध्य कर सकती  हैं। जैसे - 

यात्रीगण, कृपया ध्यान दें 
ईश्वर सो गया है। 
दुनिया आटो-पायलट मोड पर चल रही है 
उम्मीद और सीट-बेल्ट कसकर बाँध लें। 

नाद :- 

रचना में नाद का होना मतलब उसका सुनाई देना, उसके शब्दों की ध्वनि को महसूस करना। "खुशियों के गुप्तचर" में संकलित कई कविताएँ अपनी इस विशेषता में सफल हैं। जैसे - 

गरम तवे पर पड़ी पानी की बूँदों-सा 
छन्न करके गया जीवन भी 
बेकार नहीं जाता, 
तवे को वाद्ययंत्र की तरह बजा जाता है। 

अप्रस्तुत-योजना :- 

रचनाकार अपनी अभिव्यक्ति को हृदयस्पर्शी बनाने के लिए अप्रस्तुतों का सहारा लेता है। गीत चतुर्वेदी ने यह प्रयोग इतने सटीक ढंग से किया कि उनकी अभिव्यक्ति की छाप सीधे पढ़ने वाले के मस्तिष्क पर पड़ती है। जैसे- 

कुम्हार गढ़ता है जैसे कच्ची मिट्टी से बर्तन 
दूर बजते संगीत ने अपनी आवाज़ से गढ़ा है मुझे 


खुशियों के गुप्तचर : गीत चतुर्वेदी (पुस्तक समीक्षा)


बाह्य-स्वरूप :- 

पद्य-सृजन में जितनी भूमिका सौंदर्य की होती है ठीक उतनी ही भूमिका उसके स्वरूप की भी होती है। बाह्य-स्वरूप की बात करें तो लय का विशेष स्थान होता है। कहते हैं लय ही हमारे जीवन का आधार है। भाषा के प्रवाह में लय का होना नये का सृजन है। गीत चतुर्वेदी की कविताओं का लय कहीं भी भंग नहीं हुआ है। 

ये कविताएँ मुक्त-छंद में लिखी गयी हैं , जो आधुनिक संदर्भ में ज्यादा प्रासंगिक है। 
कविता का स्वरूप काफी हद तक उसमें प्रयुक्त शब्दों पर निर्भर करता है। शब्द-संयोजन ही कई विशेषताओं को जन्म देता है। जैसे - 

प्रेम में 
डूबी स्त्री का चेहरा
बुद्ध जैसा दिखता है। 

जब थोड़े ही शब्दों में अधिक भावों का प्रकाशन सहजता से हो जाए तो इस विशेषता को भाषा की चित्रात्मकता कहते हैं, जिसका प्रयोग, पालन गीत चतुर्वेदी ने कुशलतापूर्वक किया है। 

आंतरिक-स्वरूप :- 

कविता की आत्मा को समझने के लिए उसका आंतरिक-स्वरूप ही अधिक उत्तरदायी होता है। गद्य-पद्य का मूल-अंतर भी आत्मा की भिन्नता के कारण ही स्पष्ट होता है। 

काव्य का संबंध हृदय से होता है। सामान्य-जनों की अपेक्षा कवि ज्यादा संवेदनशील होता है, गीत चतुर्वेदी की संवेदनशीलता उनकी इस पंक्ति से देखी जा सकती है - 

मेरी हिचकी 
एक अधूरी छूटी कविता द्वारा 
लगाई गई पुकार है। 


कविताओं में तीव्रता के साथ व्यापकता का मेल आवश्यक है।  जीवन की वस्तुएँ या घटनाएँ कवि के हृदय में जो-जो भाव जागृत करती हैं उन्हें ही अनुभूति की व्यापकता कहा जाता है। जैसे - 

मैं घास का तिनका हूँ 
लेकिन ऐसे अजीब आकार का 
कि दूर से देखने पर तोप लगता हूँ। 

कहने का ढंग ही कविता की शक्ति है, जो प्राण संचरित करती है। यहाँ रचनाकार के कहने का ढंग इतना संतुलित और प्रभावशाली है कि आज का हिन्दीतर युवा भी काव्य-संग्रह पढ़ लेता है और उसकी चर्चा भी करता है। 

कविता का प्रमुख उद्देश्य उपदेश देना तो नहीं है लेकिन जीवनानुभव से उपजे विभिन्न भावों को उदारता तक पहुँचाना जरूर उद्देश्य में ही शामिल है। गीत चतुर्वेदी को अपनी इन कोशिशों में अपार सफलता मिली है। पाठक इनकी कविताओं से स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। इनकी कविताओं में आप कहीं भी कलुषता नहीं पायेंगे, सर्वत्र एक विशिष्ट सहजता ही दर्शित होती है और यही "खुशियों के गुप्तचर" की विशेषता है, सफलता है। 

नई वाली स्टोरी / Nayi wali story कवि, लेखक, अनुवादक गीत चतुर्वेदी को "खुशियों के गुप्तचर" के लिए असीम बधाई देती है साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है।

- खनक तिवारी (Admin panel Nayiwalistory)

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Abhishek Aryan

विज्ञान का अध्येता और कलाप्रेमी हूँ। कुछ रोचक करते और लिखते रहने की कौतूहल ने कब मेरे भीतर कहानियों को प्लांट कर दिया मुझे भी नहीं पता चला। लिखना और पढ़ना दोनों मेरे लिए किसी वृक्ष के पत्ते से बात करने जैसा है। facebook blogger instagram

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