डिअर जादव जी, कैसे हैं ? (हास्य-व्यंग्य कथा)

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 चित्र- सृजन राज


डिअर जादव जी, कैसे हैं ? Dear yadav ji, kaise hai- hindi love breakup story 2021


रात कड़ाके की ठंड के बाद अभी सूर्य भगवान ने अपने आँख खोले हैं। पत्तियों की गोद में ओंस की बूंदें किसी मासूम बच्चे की तरह खिलखिला रहे हैं। कुछ फूल अभी क्रॉस पॉलीनेशन के फेज में होंगे, कुछ दस ग्यारह बजे तक खिल आएंगे और कुछ टूटकर किसी बबिता कुमारी नामक प्रेम पत्र के पन्नों में आई लभ यू जानेमन के साथ लभ परसेंटेज बढ़ा रहे होंगे। 


बढ़ती ठंड के साथ पछियारी टोला के हरेराम जादो का भी लभ परसेंटेज बढ़ रहा था। आठ बजे दूध दुहने वाला हरेराम पाँच बजे भोर में ही दूध दुह देता। छह बजे से पहले ही सानी पानी सब कर देता। देखते देखते गइया मोटाने लगी। राह गुजरते आदमी भी पूछ बैठते "का हो हरेराम तोहार गइया तो मोटा रहल हो, सानी पानी पर खूब ध्यान देले बाड़ा न"


इधर हरेराम जादो का मन तो "मेरे सामने वाली खिड़की में एक चाँद का टुकड़ा रहता है" टाइप हो गया था। मुस्कुराते और कहते क्या बतावे जगोधर मिसिर अबकी गाय अच्छी नस्ल की पकड़ाई है, भर बाल्टी दूध देती है। कुछ बेचते हैं, कुछ खाते हैं बाकी सब ऊपर वाले के हाथ में है। आपको दूध वूध चाहिए होगा तो बोलिएगा हम भिजवा देंगे।


बात बन गई। तय हुआ कि हरेराम आधा किलो दूध रोज पहुँचा आएंगे। अभी तक हरेराम जादो बबिता के घर के सतरह चक्कर मारकर और घण्टियों की इंस्ट्रुमेंटल आवाज से ही अपने लभ परसेंटेज को बढ़ा रहे थे लेकिन अब दूध एक समसामयिक मुद्दा हो गया था।


हरेराम का मन होता कि वो अभी के अभी वर्गीज कुरियन से मिलें और उन्हें बताएँ कि "हे कुरियन बाबा आप न होते तो पता नहीं और कितने दिन रोज का सतरह चक्कर मारकर छंदमुक्त आंदोलन करना पड़ता।"

 

गाय और दूध के फायदे में प्रेम का भी फायदा है ये कुरियन अभी अभी जान पाया था। उसे लगने लगा था ये कुछ हो न हो शोध का विषय जरूर है।


तेरह दिन में एक बार नहाने वाला हरेराम अब "सिरी राम चन्द्र कृपालु भजवन" याद करने लगे। बाल्टी में पानी देख मंत्र पढ़ते फिर बबिता को याद करते हुए लोटा देह पर उझल लेते। साबुनलेपित नहानक्रिया में कई बार ऐसा भी हुआ कि पानी का पहला लोटा लेते ही लोटा हाथ से फेका गया पर हरेराम जादो कभी हार नहीं माने। समर्पण का ज्वालामुखी अब उनके अंदर बैरन द्वीप का रूप ले चुका था।


एक हिम्मतकारी नहानक्रिया के बाद हरेराम जादो अपनी भौजाई के सिंगार बॉक्स से इत्र फुलेल निकाले और देह पर छिड़क लिये, फेयरलवली के चमत्कारी प्रयोग और लीप बाम के रहस्यनुमा फायदे हरेराम जादो अभी अभी जान पाये थे। ऐनक के सामने खुद को देखते, मुस्कुराते और कभी कभी प्रेमचालीसा के मानकों पर खरे उतरकर चिल्ला पड़ते हाय डिअर बबिता...लभ यू जानेमन। 


अब जगोधर मिसिर के घर दूध पहुँचाने का दिन था। हरेराम कमंडल लिये और चल दिये मंजिल की ओर। घर में जगोधर दिखे, जगोधर की पत्नी दिखी, बच्चे दिखे, खाट, पलंग, बक्सा, खटिया सब देख लिये लेकिन बबिता कहीं दिखी नहीं। हरेराम का मन हे राम हो गया। जैसे अभी अभी नेशनल फिफ्टी का सेंसेक्स मुँह के भार धड़ाम से गिर गया हो।


हरेराम कमंडल लिये और वापस चल आये। आज लग रहा था मन एक ओज़ोन लेयर का परत है और अल्ट्रावायलेट किरण उसमें ड्रिल से छेद कर रहा हो। कभी दिल्ली रह रहे हरेराम के बाबूजी का फोन आता तो- हरेराम बताते कि गइया, गोरु, माई, भौजाई, खेत, खलिहान सब ठीक है लेकिन वो ये नहीं बताते कि मन आजकल बबितेश्वर हो चुका है।


शायरी, नज़्म और ग़ज़ल पढ़ने लगे हैं। फूलों की खूबसूरती उन्हें बबितामय हो जाने जैसा लगता है। दिन भर के काम के बाद ऐनक को मुँह के भाप से ब्लर करते और उसपर उँगली से बबिता लिखकर ऐनक को चूम लेते।


इधर आज हरेराम कागज के टुकड़े पर दिल बनाकर शायरी लिख रहे हैं- 


राज़ खोल देते हैं नाजुक से इशारे अक्सर,

कितनी खामोश मोहब्बत की जुबान होती है।


हरेराम कमंडल लिये और चल दिये बबिता के घर। संयोग से आज बबिता घर पर अकेली थी। बबिता कमंडल ली। दोनों एक दूसरे की आँखों में उतरकर देखे और कागजनुमा शायरी बबिता की चूड़ियों में फ़ँसा गए। 


आज क्या मन था कि बबिता चाय भी पूछ ली। हरेराम रोक भी न पाये खुद को। अपने घर का दूध बेचने वाले आज प्रेमिका के घर चाय की चुस्की ले रहे थे। उन्हें लग रहा था कि सात महीने से रोज का सतरह चक्कर मारने की थकान आज क्षण भर में ही चाय की मिठास ने दूर कर दिया हो।


रात होती है। व्हाट्सएप्प पर बबिता का मैसेज आता है। डिअर जादव जी, कैसे हैं? हरेराम अकबका गए इतनी रात को इतनी मधुरता से किसने याद कर लिया। डीपी देखते हैं तो पता चलता है जगोधर मिसिर की बेटी बबिता है। एक बार चहक पड़ते हैं। आपको नम्मर कैसे मिला बबिता जी?


अरे जादव जी शायरी के नीचे अपना नम्मर लिख कर हमार चुड़ी में फँसाये थे जे भूल गए? अजीब हैं आप भी गाय पालते हैं, गाय दुहते हैं लेकिन दिमाग भैंस वाला रखते हैं। बेज्जतिनुमा व्हाट्सएप्प शोषण जैसे विषय भी होते हैं हरेराम इतनी रात को अभी अभी जान पाया था। 


फिर एक मैसेज आता है। तब क्या ख्याल है जादव जी, लभ हो गया हमसे का? हरेराम फिर अकबका उठते हैं। सेल्फी कैमरा ऑन करते हैं अपना बेहोशिनुमा मुँह देखते हैं। गमछे से पसीना पोछते हैं और काँपते उंगली से टाइप करते हैं नहीं नहीं... बबिता जी हम तो नहीं करते हैं। आप करती हैं क्या? 

तब तक बबिता जादव जी को व्हाट्सएप्प पर ब्लॉक कर चुकी होती है। हरेराम जादो बेचैन हो उठते हैं अभी अभी तो डीपी दिख रहा था कहाँ गायब हो गया। नम्मर कीपैड पर नोट करते हैं कॉल लगाते हैं। पर कॉल वेटिंग में जाता है। फिर लगाते हैं फिर वेटिंग में जाता है। उस दिन से कइयों बार लगा चुके हैं पर नम्मर या तो बंद बताता है या वेटिंग में। 


आज हाल ये है कि जादव जी गइया बेच कर बीड़ी पीने लगे हैं, बाबा की बूटी भी ले लेते हैं और चरस, हीरोइन, तम्बाकू भी। 


इधर मैं आगामी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए केंद्रीय बजट के पन्ने पलट रहा हूँ जिसमें भारत को टीबी मुक्त देश और दूध प्रसंस्करण क्षमता को दुगुना करने का लक्ष्य 2025 रखा गया है। और रेडियो पर गीत बज रहे हैं- तेरी गलियों में न रखेंगे कदम आज के बाद..........


अभिषेक आर्यन


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